Tuesday, 18 March 2025

हम उम्र

क्या हम उम्र के मित्र खुश नसीब नहीं हैं जो इस वर्तमान समय काल में इस दुनिया में आए?
वैज्ञानिक समय से सोचें तो पहली बात में तथ्य है कि किस्मत से मां बाप के खून में बसे तथा  मिले करोड़ों अणुओं में से जो अणु हैं उन्हें अब तक के जन्मे  सभी मनुष्यों  में हम भी हैं।
अभी तक की खोज जो ब्रह्मांड से हुई है, उनमें औरों जीव जंतुओं  में से जो सोचने समझने वाली शक्ति प्रकृति के सहयोग द्वारा मिली है उसके हम हिस्सेदार है। फिर जो जीवनशैली हमें मिली है उसके क्रिएटर को जीने , जिसे पीड़ी  भी कहा जाता है, साधने में हमारा साथ प्रकृति ने उसी के द्वारा बताए ज्ञान की खोज से संभव हुआ। जबकि हमारे पुरखों  से ये  सब मेहनत  को सफलता तो मिली परंतु आज के मुकाबले बहुत ढीली थी । तब के टाइम में न बिजली थी न स्वच्छ पानी। 
कम्प्यूटर युग की तो दूर की बात थी । जिन प्राकृतिक धातुओं का प्रयोग हुआ उसमें समानता तो थी या है, उसको खोज कर मॉडिफाई करना मनुष्य के 
पढ़े लिखे दिमाग की फितरत है। जिससे हमें इतना जल्दी कम समय में सफलता मिली।
आज का समय वह है कि जब कोई नए मॉडल की मशीनरी या वस्तु व मेडिकल इलाज  दिन ब दिन आधुनिक होते जा रहे हैं । कोई दिन ऐसा नहीं निकलता जब  नया कुछ न दिख जाए।  मशीन रिपेयरिंग का काम बहुत कम हो गया है। हर कोई कुछ नया मांगता है। 
इस तरक्की के साथ  आपसी मिलना  लगभग समाप्त हो चला है  । कुछ पड़ चुकी गलत आदतों से बचना जरूरी नहीं हुआ है?

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