सो फिर भी आज मैं आपको आपके सवालों का लिखित रूप में जवाब इस लिए लिख रहा हूँ। कि हमारी सफाई को उस रिश्ते में बताते हुए आप से कोई पक्षपात न हो। वैसे भी मैंने आपके जोहनी के उस वार्तालाप को रिकॉर्ड कर लिया था पर जोहनी द्वारा जो जवाब दिए गए उन का विस्तार कुछ तथ्य के साथ देना मेरा फ़र्ज़ था । जो आरोप जोहनी पर आपने लगाए उस्के जवाब उसने बखूबी दिए जिसका मुझे फक्र है।
कहते हैं न जब कोई दूसरा सुनना न चाहे तो जवाब बेशक सबूत सहित हों पर जो फैंसला करने वाला इरादा पहले से ही बनाए बैठा हो तो उसकी सुनाना या कुछ दिखाना गैर जरूरी हो जाता है।
कल की आपकी बातों से पक्का लग गया था कि आपने अपनी राय पहले से बनाई हुई है जो खानापूरी की भी तो केवल उन लोगों की बात रखने की थी। और हमें वार्निंग की थी कि क्यों हम लोग आखरी फैंसले पर जल्दी मचा रहे हैं वो उन्होंने करना ही नहीं है सिवाए दो चार साल बर्बाद करने के।
चलो हमे यह अंदेशा भी था कि वो हमारे पोते को लेकर ब्लैकमेल करने वाले भूखे भेड़िये निकलेंगे। अब क्योंकि जोहनी ने ही जुबानी कह दिया है कि अब हमें बच्चे की जरूरत भी नहीं है और मुआवज़ा भी देंगे पर उन्हें भूख कुछ ज्यादा ही है। वो भी समय आने पर हिसाब कर लेंगे पर इस घटना से आपकी व आपके मम्मी की भूमिका जो दिखाई दी वो सबक लेने लायक रही । यह जरूर जिंदगी भर याद रखा जाएगा।
मुझे यानी गुरमीत सिंह गंभीर को आपकी बात जो सबसे अधिक चुभ रही है कि हम लोग आपके घर क्यों आए?
उसका जवाब देना मैं सबसे पहले ही देता पर इतनी अधिक गर्मी दिखाना मेरे लिए ठीक नहीं था क्योंकि मैं पहले ही मान चुका हूं कि इस रिश्ते को बनाने में मैंने ही अपनी मर्ज़ी की और बहुत जल्दी की जिसमें मेरा अकेला बेटा और मेरी बीवी की जिंदगी में एक बदनुमा दाग लग गया। और आपने अपनी बहन के लिए शादी में बिरादरी की रोटी के लिए पैसों का ििइंतजाम किया
No comments:
Post a Comment