Thursday, 22 July 2021

सच्ची मिठास

#सच्ची_मिठ्ठास" 

फरीद साब जब पांच छ: साल के थे तब से।
उनकी माता रोज़ फरीद साब के मुसल्ले के
(कारपेट जिस पर मुसलमान नमाज़ पढ़ते हे)
नीचे कोई मीठी
चीज जेसे मिश्री 'शकर
या खजूर,गुड़ वगेरा जरुर रखती थी जिससे
फरीद साब मीठी
चीज के लालच में नमाज़
नियमित पढ़े। और फरीद जी को बता दिया
था कि ये तेरी नमाज़ से खुश होकर
हर रोज़ अल्लाह तुझे देकर जाता हे।
एक बार फरीद साब की माता काम से
कहीं बाहर गई तो आने में देर हो गई इस
लिये फरीद साब जब पूरी लगन से नमाज
पढ़ कर उठे तो उन्हें मीठी
चीज़ न मिली
अल्लाह ये रोते हुवे विरह में बोले मेने तो
पूरे मन से नमाज़ पढ़ी थी फिर तूने
आज कबूल क्यों न की और इसी
सच्ची विरह
में रोते रोते उनका ख्याल उस god से
परमात्मा से अल्लाह से जुड़ गया और उन्हें
god की वो मिठ्ठास मिल गई जिसकी
तुलना इस दुनियाँ की किसी
मीठी चीज
से नही की जा सकती।
थोड़ी देर में जब
माता लोट के आई तो उसने देखा फरीद
जी दरवाजे पर बैठे हे और उनकी
आँखों से झर झर आंसू बह रहे हे माता ने
सोचा आज में मीठी चीज रखना
भूल गई
इसलिये फरीद रो रहा हे माता ने अंदर जाकर
जल्दी से मुसल्ले के नीचे बाज़ार से लाई
खजूर रखी और फरीद जी को
बोली
बेटा कभी कभी अल्लाह किसी
काम से
दूसरों को मीठी चीज देने जाते
हे तो देर हो
जाती हे तुम अंदर जाकर देखो कुछ जरुर
रखा होगा। लेकिन फरीद जी टस मस
न हुवे और उनके आँखों से वेसे ही आंसू
बहते रहे।तब माँ का दिल बैठने लगा और
उसकी आँखों से भी आंसू आने लगे माँ ने
सोचाआज तो भारी गलती हो गई
तब फरीद साब ने माँ के आंसू पोंछते हुवे
बोला "माँ तेरे झूठे खजूरों के लालच ने,
झूठी शकर की मिठास के लालच ने मुझे
आज उस अल्लाह की सच्ची मिठ्ठास
का अनुभव करवा दिया ।माँ में तेरा
शुक्रगुजार हू।इसीलिये फरीद
जी ने कहा
शकर खंड निवात गुड़,माखिओं माझा दुध।
सभे वस्तु मिठियाँ,रब न पूजन तुद।
नानक जी भी यही कहते हे
:-
"कुजा मेवा सब कीछ में चाखया।
इक अमृत नाम तेरा जी।

Veer Ji via Whatsaap

Saturday, 17 July 2021

भीड़, भेड़ व भेड़िया

भीड़ व भेड़ में कोई फ़र्क नहीं होता बशर्ते उनको लीड करने वाला भेड़िया न हो। 

देखने को तो गड़रिया भी हो पर  मास्क के नीचे या साथ में एक भेड़िये जैसा कुत्ता जरूर पाल रखा होता है,

जो अपने आतंक से अपने मालिक की भेड़ों पर कंट्रोल रखता है और दूसरे बेड़ों की भेड़ों को डर या लालच से अपनी ओर खींचता है।

Seriously

Friday, 20 November 2020

44 years

जिस वजय से हमारे परिवार के सुखों की शुरुआत में ही एक सदस्य की मृत्यु के साथ दुख उमड़ आया था। वही वजय से आज उन्हीं दुखो का अंत भी  परिवार के किसी सदस्य की कुर्बानी मांग रहा है।

Monday, 16 November 2020

498/34

मैं गुरमीत सिंह गंभीर पिता का नाम स्वर्गीय सरदार प्यारा सिंह , मौजूदा पता सी -5/10 , सैक्टर 15, रोहिणी, दिल्ली-110089, समय सुब्य के 2:27 दिनांक 17/11/2020  
मेरी पत्नी सरदारनी सुरजीत कौर पति का नाम स. गुरमीत सिंह गंभीर, मौजूदा पता सी -5/10 , सैक्टर 15, रोहिणी, दिल्ली-110089, समय सुब्य के 2:27 दिनांक 17/11/2020 
मेरा पुत्र स. जयदीप सिंह, पिता का नाम से. गुरमीत सिंह गंभीर, मौजूदा पता सी -5/10 , सैक्टर 15, रोहिणी, दिल्ली-110089, समय सुब्य के 2:27 दिनांक 17/11/2020 
मैं अपने सोशल मीडिया के ब्लॉगर  Gambhir Says जो कि मेरा निजी ब्लॉग है से अपने परिवार सहित एक आशंका है उसे लिखित रूप में जाहिर करना चाहता हूं कि--
मेरे पुत्र जयदीप सिंह की शादी जो कि सरदारनी हरनीत कौर सपुत्री स जगजीत सिंह बग्गा पता संत गढ़ , शाहपुरा, थाना तिलक नगर दिल्ली से 6 दिसंबर 2016 को हुई थी, जो उनकी आपसी अनबन के होते घरेलू झगड़े, दहेज के आरोप प्रतारोप महिला मंडल, कीर्ति नगर दिल्ली के चलते आज चार साल की अवधि में पुलिस थाना, कोर्ट कचहरी में उलझ कर रह गई है। जिसका वर्णन रिकॉर्ड में है। इस अवधि के दौरान इनका एक लड़का भी हुआ 9 दिसंबर 2017 को। 
हम दोनों परिवार  की जानकारी में यह लड़की (बहु) इन चार सालों में तीन साल अपने मायके में ही रही। हम ससुराल वालों पर मायके वाले पक्ष ने तीन मुकदमें दर्ज करवाए। घरेलू झगड़े, दहेज की मांग, व मेन्टेन्स के जो कि तीस हजारी कोर्ट में विचाराधीन हैं।  
इसी बीच तिलक विहार चौकी से भी हम पूरे ससुराल पक्ष को बुलाया जाता रहा। पिछले दिनों तिलक विहार चौकी से हमें राजेश यादव मोबाइल नम्बर से कॉल आई कि सुबह 9 बजे मिल लें । क्योंकि हमें पहले ही आशंका थी कि गिरफ्तारी न हो जाए हमने सैशन कोर्ट से पांच दिन पहले के नोटिस के लिये अग्रिम जमानत ले रखी थी। 
मेरे (गुरमीत सिंह बीमार होने की वजह) को छोड़ कर मेरा बेटा व मेरी पत्नी वहां चौकी हाजिर हुई तो हेड कांस्टेबल राजेश ने उनसे किन्ही तीन नोटिस पर रिसीविंग के हस्ताक्षर करवा लिए । पूछने पर चेतावनी देते हुए किसी सिफारिश या वकील को न कहने के वादे के साथ एक बार फिर हम तीनों को दिनांक पर शाम 6 बजे बुलाया और 498 व 377 के किसी मामले के दर्ज व गिरफ्तारी का डर दिखा एक लाख की डिमांड रखी व कहा कि मैं आप दोनों पक्षों में बिना किसी वकील को बीच मे डाले सेटल मेन्ट करवा दूंगा। जबकि मेरी बहु ने महिला मंडल पुलिस थाना, कोर्ट तीस हजारी में वापस ससुराल आने को मना कर दिया। हुआ है व बार बार हमें बन्द करवाने की धमकी देती रही है। औऱ भी कई आरोप हैं जो उसने अपने बयान देकर हस्ताक्षर कर रखे हैं।  मरता क्या न  करता को सोच कर मैंने स्वंय राजेश HC को उसी समय दस हजार एडवांस रुपये दिए बाकी दूसरी किश्त दिवाली के बाद 19 नवम्बर को 20 हजार देने का वादा किया। 
बदले में राजेश जी ने यह 498 का मुकदमा व बाकी के तीन मुकदमे हाई कोर्ट से वापसी लेने का वादा किया कि मैं दूसरी पार्टी को जैसे तैसे मनालूँगा। पर यह नहीं बताया कि लड़की वापिस ससुराल आएगी या तलाक देकर केस वापस लेगी। जबकि तीस हजारी कोर्ट से बच्चे की कस्टडी मां के पास होने की वजय से 3000 रुपये महीना मेन्टेन्स तय किया हुआ है। 
अब हमें आशंका जाग रही है कि राजेश रिश्वत लेकर या लड़की को बिना कोर्ट पेशी के मोटी रकम दिलाकर या हमें गिरफ्तार न कर ले तो मुझे यह ब्लॉग लिखना पड़ा। दिनाक 17 नवम्बर 2020 समय 3 बजकर 10 मिंट। गुरमीत सिंह गंभीर मोबाइल नम्बर 8882505953 । 

Saturday, 14 March 2020

विक्की के सवालों के जवाब

बेशक रिश्ते में तुम मेरे भतीजे हो पर जब से तुम्हारी मौसेरी बहन से मेरे लड़के की शादी हुई है तुम्हारा व्यहवार शुरू में तो सही था पर पिछले तीन सालों से उस संबध के नाते तुम्हारा भतीज़पन उस बहु के हमारे साथ बेरुखे वर्ताव के होते बदलता चला गया । उस तनावपूर्ण स्थिति में बिगड़ते रिश्ते धीरे धीरे आज उस हद तक आ गए कि तुम्हें अपने भाई की सफाई में भी एक दुश्मन की चाल महसूस होने लगी। जो एक तरफा डांट से लेकर दोष तक में उसकी हिस्सेदारी 100 प्रतिशत समझ लिया। आखिर यह तो होना ही था। तुम्हे दोनों तरफ की रिश्तेदारी को एक तरफा तो करना ही था।
सो फिर भी आज मैं आपको आपके सवालों का लिखित रूप में जवाब इस लिए लिख रहा हूँ। कि हमारी सफाई को उस रिश्ते में बताते हुए आप से कोई पक्षपात न हो। वैसे भी मैंने आपके जोहनी के उस वार्तालाप को रिकॉर्ड कर लिया था पर जोहनी द्वारा जो जवाब दिए गए उन का विस्तार कुछ तथ्य के साथ देना मेरा फ़र्ज़ था । जो आरोप जोहनी पर आपने लगाए उस्के जवाब उसने बखूबी दिए जिसका मुझे फक्र है।
कहते हैं न जब कोई दूसरा सुनना न चाहे तो जवाब बेशक सबूत सहित हों पर जो फैंसला करने वाला इरादा पहले से ही बनाए बैठा हो तो उसकी सुनाना या कुछ दिखाना गैर जरूरी हो जाता है।
कल की आपकी बातों से पक्का लग गया था  कि आपने अपनी राय पहले से बनाई हुई है जो खानापूरी की भी तो केवल उन लोगों की बात रखने की थी। और हमें वार्निंग की थी कि क्यों हम लोग आखरी फैंसले पर जल्दी मचा रहे हैं वो उन्होंने करना ही नहीं है सिवाए दो चार साल बर्बाद करने के।
चलो हमे यह अंदेशा भी था कि वो हमारे पोते को लेकर ब्लैकमेल करने वाले भूखे भेड़िये निकलेंगे। अब क्योंकि जोहनी ने ही जुबानी कह दिया है कि अब हमें बच्चे की जरूरत भी नहीं है और मुआवज़ा भी देंगे पर उन्हें भूख कुछ ज्यादा ही है। वो भी समय आने पर हिसाब कर लेंगे पर इस घटना से आपकी व आपके मम्मी की भूमिका जो दिखाई दी वो सबक लेने लायक रही । यह जरूर जिंदगी भर याद रखा जाएगा। 
मुझे यानी गुरमीत सिंह गंभीर को आपकी बात जो सबसे अधिक चुभ रही है कि हम लोग आपके घर क्यों आए? 
उसका जवाब देना मैं सबसे पहले ही देता पर इतनी अधिक गर्मी दिखाना मेरे लिए ठीक नहीं था क्योंकि मैं पहले ही मान चुका हूं कि इस रिश्ते को बनाने में मैंने ही अपनी मर्ज़ी की और बहुत जल्दी की जिसमें मेरा अकेला बेटा और मेरी बीवी की जिंदगी में एक बदनुमा दाग लग गया। और आपने अपनी बहन के लिए शादी में बिरादरी की रोटी के लिए पैसों का ििइंतजाम किया

Monday, 20 March 2017

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